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पूरी दुनिया को सुखी समृद्ध करने कामधेनु माता उपकारी है;
भारतीय गोवंश का लालन पालन  हम सब के लिए हितकारी है।

जय.. जय…

वैदिक काल से ही भारत में गाय का महत्व रहा है। गोकुलाष्‍टमी भारतीय संस्‍कृति का एक महत्‍वपूर्ण पर्व है। मानव–जाति की समृद्धि गौ-वंश की समृद्धि के साथ जुड़ी हुई है। अत: गोपाष्‍टमी के पावन पर्व पर गौ-माता का पूजन-परिक्रमा कर विश्‍वमांगल्‍य* की प्रार्थना करनी चाहिए। 

 *विश्‍वमांगल्‍य – Benevolence for all.
ISHT Life for all.

पौराणिक काल से यह आस्था है की गौ-सेवा से धन-सम्‍पत्ति, आरोग्‍य आदि मनुष्‍य-जीवन को सुखकर बनानेवाले सम्‍पूर्ण साधन सहज ही प्राप्‍त हो जाते हैं।

गाय के शरीर में सूर्य की गो-किरण शोषित करने की अद्भुत शक्ति होने से उसके दूध, घी, झरण आदि में स्वर्णक्षार पाये जाते हैं जो आरोग्य व प्रसन्नता के लिए ईश्वरीय वरदान हैं। गाय के दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर (या गोबर का पानी) को सामूहिक रूप से पंचगव्य कहा जाता है; आयुर्वेद में इसे औषधि की मान्यता है। पंचगव्य का उपयोग कृषि कार्यों में उर्वरक और कीटनाशक के रूप में भी किया जाता है।

भारतीय गाय की मुख्य २ विशेषताएँ हैं-

  1. सुन्दर कूबड़ (HUMP)
  2. उनकी पीठ पर और गर्दन के नीचे त्वचा का झुकाव है : गलकंबल (DEWLAP)

भारत में गाय की ३० से अधिक नस्लें पाई जाती हैं।
रेड सिन्धी, साहिवाल, गिर, देवनी, थारपारकर आदि नस्लें भारत में दुधारू गायों की प्रमुख नस्लें हैं।

लोकोपयोगी दृष्टि में भारतीय गाय को तीन वर्गों में विभाजित किया जा सकता है। पहले वर्ग में वे गाएँ आती हैं जो दूध तो खूब देती हैं, लेकिन उनकी पुंसंतान अकर्मण्य अत: कृषि में अनुपयोगी होती है। इस प्रकार की गाएँ दुग्धप्रधान एकांगी नस्ल की हैं। दूसरी गाएँ वे हैं जो दूध कम देती हैं किंतु उनके बछड़े कृषि और गाड़ी खींचने के काम आते हैं। इन्हें वत्सप्रधान एकांगी नस्ल कहते हैं। कुछ गाएँ दूध भी प्रचुर देती हैं और उनके बछड़े भी कर्मठ होते हैं। ऐसी गायों को सर्वांगी नस्ल की गाय कहते हैं।

गौ की महिमा को समझकर उससे प्राप्त दूध, दही आदि पंचगव्यों का लाभ ले तथा अपने जीवन को स्वस्थ, सुखी बनाये – इस उद्देश्य से हमारे परम करुणावान ऋषियों-महापुरुषों ने गौ को माता का दर्जा दिया तथा कार्तिक शुक्ल / श्रावण कृष्ण ष्टमी के दिन गौ-पूजन की परम्परा स्थापित की।

चलो सभी के लिए विश्‍वमांगल्‍य* की प्रार्थना करें |

जय.. जय…

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