To live and enjoy इष्ट जीवन

इष्ट जीवन मंच presents

Holistic package इष्ट जीवन धारा

 

जिवंत जीवन जिए!

सांप्रत समाज के जागृत, जिम्मेदार एवं कर्तव्य परायण; शिष्ट विशिष्ट ऐसे  ‘इष्ट जीवन’ अभिलाषीओ का यहाँ इस   ‘इष्ट जीवन’ मंच  पर स्वागत करते हुए अपूर्व आनंद की अनुभूति हो रही है।

सभी को :

  • मौज, मस्ती, आनंद, मंगल से भरपूर 
  • विकास, सफलता, शुभ लाभ से तृप्त
  • आधिभौतिक, आधिदैविक तथा आध्यात्मिक हितों से संयुक्त
  • स्वकल्याण, जनकल्याण, विश्वकल्याण, परमकल्याण को उपलब्ध

ऐसा सभी प्रकार से वांछनीय… अर्थात ‘इष्ट’ जीवन तो जीना ही हैं…

वास्तव में, सही मायने में ‘जीवंत’ ऐसे ‘इष्ट जीवन यापन’ की आशा-इच्छा प्रत्येक के हृदय में होती ही है ।

स्वानुभव से हरेक को इतना तो प्रतीत होता ही है की हम सभी ‘इष्ट जीवन यापन’ हेतु ही दिन रात प्रयत्नशील है ।

ऐसे ही ‘इष्ट जीवन यापन’ के चाहक, साधक, समर्थक एवं प्रवर्तक सदस्यों द्वारा, सदस्यों के लिए, सदस्यों का मंच अर्थात यह ‘इष्ट जीवन मंच’। यहाँ उल्लेखनीय है ‘इष्ट जीवन’ मंच के ‘विजन’ और ‘मिशन’

 

विजन :

सदा और सर्वदा सभी का कल्याण हो

सर्वेषां स्वस्तिर्भवतु, सर्वेषां शान्तिर्भवतु |

सर्वेषां पूर्ण भवतु, सर्वेषां मंगलं भवतु ||

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः |

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मां कश्र्चिद् दुःख भाग्भवेत् ||

 

मिशन :

‘मंच-सदस्यों’ के ‘इष्ट जीवन यापन’ में 

उपयोगी, प्रयोज्य, सहायक विविध सेवा, सुविधा और अवसर का 

आयोजन, नियोजन, कार्यान्वयन एवं संचालन।

इस ‘विजन’ और ‘मिशन’ की परिपूर्णता के आशय से तथा ‘इष्ट जीवन’ आकांक्षीओं के लिए ‘इष्ट जीवन’ मंच अत्र प्रस्तुत करता है :

‘इष्ट जीवन धारा’ होलिस्टिक पैकेज (साकल्य सम्पुट)।

अभी आप स्वयं के, प्रियजनों के, समाज, राष्ट्र तथा विश्व सकल के ‘इष्ट जीवन’ को संभव या साकार करने यह ‘इष्ट जीवन’ धारा नामक होलिस्टिक पैकेज की सहभागिता (participation) का विकल्प पा रहे हैं…

इसी लिए तो इस ‘इष्ट जीवन’ मंच पर आपका स्वागत करते हुए आनंद की अनुभूति हो रही है।

क्या है ‘इष्ट जीवन’ ? || इष्ट जीवन ||

सर्वप्रकार से प्रियकर एवं श्रेयस्कर अर्थात ही ‘इष्ट’ वांछनीय, चाहने योग्य । जो हमारे लिए हितकारी, लाभदायक भी है और हमें प्यारा लगता है, प्रिय भी है वह ही तो इष्ट है । हम सब इष्ट ही चाहते हैं । हम इष्ट को ही पसंद करते है, इष्ट को ही प्राधान्य देते हैं जाने अनजाने ।

जीवन तो हम सभी जी ही रहे है । और ये भी इतना ही सत्य है की हम सब अपनी अपनी मर्जी अनुसार का, इच्छा अनुसार का ही जीवन जीना चाहते हैं।

जो अपनी इच्छा अनुसार का ही जीवन जी ही रहे है उन्हे भी यह प्रश्न बहुत बार होता है, ऐसी स्थिति कई बार महसूस होती है की; अपना जीवन कैसा होना चाहिए, कैसा जिया जाना चाहिए? अपने जीवन मे अभी और क्या अच्छा हो सकता है, और क्या सुधार संभव है? इसी का जवाब और इस का समाधान ही है ‘इष्ट जीवन’

सुखी जीवन, निरामय जीवन, भद्र जीवन का सुंदर एवं सुभग संयोग ही है ‘इष्ट जीवन’।

जीवन प्रमुख रूप से तीन स्तर पर जिया जाता है व्यक्तिगत जीवन, पारिवारिक जीवन, वैश्विक जीवन । जीवन के यह तीनों ही स्तर पर आवश्यक, उपयोगी एवं लाभकारक ऐसी अनेक ऋद्धि, सिद्धि एवं उपलब्धि ‘इष्ट जीवन यापन’ में स्वाभाविकता से ही समाहित है । उदाहरण के तौर पे :

♥️️ सर्वांगी आरोग्य और स्वास्थ्य  ♥️️ सफल साहस, शोध, संशोधन और आविष्कार
♥️️ विपुल धनसंपत्ती और समृद्धि  ♥️️ सर्व आयामी विकास, प्रगति तथा उन्नति
♥️️ संबंधों में आत्मीयता और सौहार्द ♥️️ लाभदायक व्यापार – धंधा और व्यवसाय
♥️️ कुलीन वंशवृद्धि और बच्चों का लालन-पालन ♥️️ सामाजिक सामंजस्य और संपन्न राष्ट्र
♥️️ परिपक्व शिक्षा और ज्ञान  ♥️️ मानव मात्र बंधुभाव और मित्रता
♥️️ गुणवान व्यक्तित्त्व और गौरवशाली चरित्र  ♥️️ सुरक्षित पर्यावरण और विश्व शांति
♥️️ सुविकसित कौशल और प्रतिभा ♥️️ साक्षात्कार और निर्वाण 
♥️️ उज्जवल कार्कीर्दी और पदोन्नति ♥️️ भोग और मोक्ष  

इसी के साथ साथ आप सुज्ञ जनों को ये तो समझ में आ ही सकता है की ‘इष्ट जीवन यापन’ द्वारा कोई भी  समस्या, तकलीफ़, पीड़ा या दुःख इत्यादि का निराकरण और निवारण नैसर्गिक तरीके से सहज संभव है । जिस तरह ज्योति से अंधकार का !!!

कैसे पाया जाए  ‘इष्ट जीवन’ ?

समान विचारधारा और उद्देश्य रखनेवाले विविध क्षेत्र और विषय के जानकार, अभ्यासु – अभ्यासकर्ता एवं अनुभवी ऐसे ‘इष्ट जीवन’ मंच के समर्पित सदस्यों द्वारा स्वयं के एवं अन्य के ‘इष्ट जीवन यापन’ को संभव और साकार करने हेतु प्रकृति सहज प्रयास हो रहे हैं ।

यह प्रयत्न अंतर्गत वेद से लेकर आधुनिक विज्ञान पर्यंत के अनेक क्षेत्र तथा विषयों जैसे की :

  • योग, आयुर्वेद, कुदरती उपचार, यूनानी, सिद्धा, होमियोपेथि, पूरक एवं वैकल्पिक चिकित्साएँ, आधुनिक उपचार पद्धति (Modern Medicines)..
  • ज्योतिषशास्त्र, अंतर्ज्ञान / अंत:प्रेरणा (Intuition / inspiration), टेरो (Tarot), डौजिंग (Dowsing), रमलशास्त्र, हस्तरेखाशास्त्र, अंकशास्त्र.. 
  • वास्तु, फेंगशुई (FengShui), पिरामिडोलोजी (Pyramidology), भूगोल, खगोल, पर्यावरण (Ecology)..
  • परंपरा, रीति-रिवाज़, कर्मकांड, अलौकिक विद्या (Sacred), गुह्य विद्या (Mystic).. 
  • कला, साहित्य, खेलकुद, व्यायाम (Gymnastics & Exercise).. 
  • मानसशास्त्र, तर्कशास्त्र (Logic), आचार-विचार (Behaviour)..
  • समाजशास्त्र, इतिहास, नागरिकशास्त्र (Civics), राजनीति.. 
  • विज्ञान, प्रौद्योगिकी-ज्ञान (Technology), गणित, भूमिति, अभियांत्रिकी (Engineering)..
  • कृषि, पशु पालन, वाणिज्य (Commerce), अर्थशस्त्र (Economics).. 
  • नितिमत्ता (Morals & Ethic), मानदंड માનદંડ (Norms), मूल्यों (Values)..
  • दर्शनशस्त्र, आस्तिक-वाद, नास्तिक-वाद..

आदि के सार तत्व का ‘इष्ट जीवन’ संदर्भित स्वीकार किया गया है । क्योंकि यह सारे ही आयाम परस्पर पूरक है, अन्योन्य आश्रित है, आपस में सहायक है, इतरेतर अविभाज्य है ।

यह सभी क्षेत्र एवं विषयों के यथायोग्य हेतुलक्षी उपयोग से ‘इष्ट जीवन यापन’ को संभव और साकार करने हेतु ‘इष्ट जीवन’ मंच पर उपलब्ध है : 

‘इष्ट जीवन’ धारा होलिस्टिक पैकेज (साकल्य सम्पुट)।

यह होलिस्टिक पैकेज ‘इष्ट जीवन’ धारा :

  • आध्यात्मिकता एवं व्यावहारिकता के परस्पर अविभाज्य दो पहलुओं से सुदृढ़ है।
  • योग, भक्ति, तंत्र की त्रिवेणी है।
  • विज्ञान का ज्ञान, अभियांत्रिकी का कौशल, कला-क्रीड़ा का सामंजस्य तथा अनुशासन की परिपक्वता इन चारों घटकों से संवर्धित है।

‘इष्ट जीवन’ रचने, विकसित करने, जीने हेतु इस होलिस्टिक पैकेज में सिद्धांत एवं अभ्यास का सुनियोजित, सुआयोजित, सुव्यवस्थित समन्वय सधा हुआ है। जिसके अंतर्गत विभिन्न आवश्यक सूत्र, निति, नियम, युक्ति, उपाय इत्यादि तथा उनके व्यवहार सुलभ यथोचित प्रयोग, विधि, पद्धति, क्रिया प्रक्रिया समाविष्ट है।

इस होलिस्टिक पैकेज में ‘इष्ट जीवन’ उत्क्रांति अनुलक्षी मार्गदर्शन और सहयोग की सेवाओं एवं तत संदर्भित उपयोगी साधन सामग्री आदि की आपूर्ति का आयोजन उपलब्ध कराया जाएगा ।

”इष्ट जीवन’ मंच’ पर इस होलिस्टिक पैकेज को उसके संभावित सहभागियों (Prospective Participants) के लाभार्थ एवं इसे व्यवहार सुलभ बनाने  हेतु प्रमुख तीन चरण है :

  1. स्पष्टीकरण से बोध 
  2. संस्कार से प्रशिक्षण 
  3. अभ्यास से व्यवहार

इन चरणों अनुसार हम ‘ ‘इष्ट जीवन’ ‘ धारा को अपना सकते हैं, आचरण में ला सकते हैं । तद् अनुसार ‘इष्ट जीवन’ पाने – जीने हेतु :

  1. पहले चरण में सहभागी को यहाँ प्रस्तुत संकल्पना और सिद्धांत को बराबर जानना, समझना और उस संबंधित बोध को यथार्थ रूप में ग्रहण करना होगा । 
  2. दूसरे चरण में सहभागी को इस मंच पर प्रयोज्य सूत्र और प्रयोग आदि के संस्कार और प्रशिक्षण की सुलभ  सुविधाओं का सुयोग्य उपभोग पाना होगा । 
  3. तीसरे चरण में सहभागी को इस मंच के माध्यम से जो बोध और प्रशिक्षण पाया होगा उसके नित्य नियमित अभ्यास से एवं व्यावहारिक उपयोग से ‘इष्ट जीवन’ की भव्यता को, धन्यता को, सार्थकता को उपलब्ध होना है  ।

प्रक्रिया क्या है?

‘इष्ट जीवन यापन’ के इच्छुक और कृतनिश्चयी ऐसे संभावित सहभागी यह होलिस्टिक पैकेज से लाभान्वित हो सके इसे अपना सके इस हेतु यहाँ प्रस्तुत है :

‘इष्ट जीवन धारा सूत्रपात प्रसंग’ (ISHT Lifestream Inception Event)

यह सूत्रपात प्रसंग अर्थात ‘इष्ट जीवन यापन’ का मंगलाचरण !  इस प्रसंग में :

  • योग-साधना, भक्ति-आराधना, तंत्र-प्रायोगिकता के प्रारंभिक अभ्यासक्रम का समावेश हुआ है । 
  • आयुर्वेद, वास्तु, ज्योतिष, कुल परंपरा वगैरह विषयों की यथोचित उपयोगिता अनुलक्षी मार्गदर्शन का निरूपण हुआ है । 
  • कर्म, ऋणानुबंध, भाग्य (Luck), भावितव्यता (Destiny), पाप और पुण्य आदि बाबत तटस्थ और निष्पक्ष रूप में निवेदित हुई है ।  
  • आहार, निद्रा, शौच, व्यायाम, श्वसन, ऊर्जान्वीकरण, धारणा और वाणी इत्यादि जीवन के आधारस्तंभ ऐसे अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दों को समाविष्ट किया गया है ।

💠  यह एक दिवसीय प्रसंग होगा, जो सवेरे से उस दिन की देर शाम तक चलेगा ।

💠   इस प्रसंग में हिंगलिश (हिंglish) या ગુજલીશ (ગુજlish) भाषा  का उपयोग किया जाएगा !!!

💠   इस प्रसंग के दौरान सहभागिओं हेतु तीन वक्त के खान-पान की सुविधा रखी जाएगी ।

सविनय सूचित किया जाता है कि :

‘इष्ट जीवन’ धारा सूत्रपात प्रसंग में सहभागी होकर आप मंच को सहकार का जो यह सुअवसर प्रदान कर रहे हैं, ईस लिए मंच अत्र धन्यता अनुभव कर रहा है !

इस सूत्रपात प्रसंग निमित्त कार्य करते समय सौभाग्यशाली मंच-सदस्य वास्तव में तो:

  • ‘उपलब्धि का प्रसार’ इस प्रकृति सहज कर्तव्य का पालन ही कर रहे हैं ।  
  • उन सब के प्रति जिनकी वजह से आज यह किया जा सका है; माता – पिता, गुरुजन – संतजन, उपदेशक – उपकारक, मार्गदर्शक – नायक, संगी – साथी, सहकर्मी – सहायक, ज्ञात-अज्ञात समर्थक एवं हितैषी ऐसे सभी के प्रति कृतज्ञता का अनुभव करते हैं।  
  • सांप्रत समाज के प्रति सेवा सहयोग के दायित्व पालन का संतोष पा रहे हैं । 
  • इष्ट से अनुगृहीत हो रहे हैं ।

और इस लिए ही इस ‘इष्ट जीवन’ धारा सूत्रपात प्रसंग में भाग लेने वाले सहभागियों को इस हेतु कोई आर्थिक मूल्य चुकाना नहीं है !

क्या है ‘इष्ट जीवन’ ? || इष्ट जीवन ||

सर्वप्रकार से प्रियकर एवं श्रेयस्कर अर्थात ही ‘इष्ट’ वांछनीय, चाहने योग्य । जो हमारे लिए हितकारी, लाभदायक भी है और हमें प्यारा लगता है, प्रिय भी है वह ही तो इष्ट है । हम सब इष्ट ही चाहते हैं । हम इष्ट को ही पसंद करते है, इष्ट को ही प्राधान्य देते हैं जाने अनजाने ।

जीवन तो हम सभी जी ही रहे है । और ये भी इतना ही सत्य है की हम सब अपनी अपनी मर्जी अनुसार का, इच्छा अनुसार का ही जीवन जीना चाहते हैं।

जो अपनी इच्छा अनुसार का ही जीवन जी ही रहे है उन्हे भी यह प्रश्न बहुत बार होता है, ऐसी स्थिति कई बार महसूस होती है की; अपना जीवन कैसा होना चाहिए, कैसा जिया जाना चाहिए? अपने जीवन मे अभी और क्या अच्छा हो सकता है, और क्या सुधार संभव है? इसी का जवाब और इस का समाधान ही है ‘इष्ट जीवन’

सुखी जीवन, निरामय जीवन, भद्र जीवन का सुंदर एवं सुभग संयोग ही है ‘इष्ट जीवन’।

जीवन प्रमुख रूप से तीन स्तर पर जिया जाता है व्यक्तिगत जीवन, पारिवारिक जीवन, वैश्विक जीवन । जीवन के यह तीनों ही स्तर पर आवश्यक, उपयोगी एवं लाभकारक ऐसी अनेक ऋद्धि, सिद्धि एवं उपलब्धि ‘इष्ट जीवन यापन’ में स्वाभाविकता से ही समाहित है । उदाहरण के तौर पे :

♥️️ सर्वांगी आरोग्य और स्वास्थ्य 

♥️️ विपुल धनसंपत्ती और समृद्धि

♥️️ संबंधों में आत्मीयता और सौहार्द

♥️️ कुलीन वंशवृद्धि और बच्चों का लालन-पालन

♥️️ परिपक्व शिक्षा और ज्ञान 

♥️️ गुणवान व्यक्तित्त्व और गौरवशाली चरित्र 

♥️️ सुविकसित कौशल और प्रतिभा

♥️️ सफल साहस, शोध, संशोधन और आविष्कार

♥️️ सर्व आयामी विकास, प्रगति तथा उन्नति

♥️️ लाभदायक व्यापार – धंधा और व्यवसाय

♥️️ सामाजिक सामंजस्य और संपन्न राष्ट्र

♥️️ मानव मात्र बंधुभाव और मित्रता

♥️️ सुरक्षित पर्यावरण और विश्व शांति

♥️️ साक्षात्कार और निर्वाण 

♥️️ भोग और मोक्ष 

इसी के साथ साथ आप सुज्ञ जनों को ये तो समझ में आ ही सकता है की ‘इष्ट जीवन यापन’ द्वारा कोई भी  समस्या, तकलीफ़, पीड़ा या दुःख इत्यादि का निराकरण और निवारण नैसर्गिक तरीके से सहज संभव है । जिस तरह ज्योति से अंधकार का !!!

कैसे पाया जाए  ‘इष्ट जीवन’ ?

समान विचारधारा और उद्देश्य रखनेवाले विविध क्षेत्र और विषय के जानकार, अभ्यासु – अभ्यासकर्ता एवं अनुभवी ऐसे ‘इष्ट जीवन’ मंच के समर्पित सदस्यों द्वारा स्वयं के एवं अन्य के ‘इष्ट जीवन यापन’ को संभव और साकार करने हेतु प्रकृति सहज प्रयास हो रहे हैं ।

यह प्रयत्न अंतर्गत वेद से लेकर आधुनिक विज्ञान पर्यंत के अनेक क्षेत्र तथा विषयों जैसे की :

  • योग, आयुर्वेद, कुदरती उपचार, यूनानी, सिद्धा, होमियोपेथि, पूरक एवं वैकल्पिक चिकित्साएँ, आधुनिक उपचार पद्धति (Modern Medicines)..
  • ज्योतिषशास्त्र, अंतर्ज्ञान / अंत:प्रेरणा (Intuition / inspiration), टेरो (Tarot), डौजिंग (Dowsing), रमलशास्त्र, हस्तरेखाशास्त्र, अंकशास्त्र.. 
  • वास्तु, फेंगशुई (FengShui), पिरामिडोलोजी (Pyramidology), भूगोल, खगोल, पर्यावरण (Ecology)..
  • परंपरा, रीति-रिवाज़, कर्मकांड, अलौकिक विद्या (Sacred), गुह्य विद्या (Mystic).. 
  • कला, साहित्य, खेलकुद, व्यायाम (Gymnastics & Exercise).. 
  • मानसशास्त्र, तर्कशास्त्र (Logic), आचार-विचार (Behaviour)..
  • समाजशास्त्र, इतिहास, नागरिकशास्त्र (Civics), राजनीति.. 
  • विज्ञान, प्रौद्योगिकी-ज्ञान (Technology), गणित, भूमिति, अभियांत्रिकी (Engineering)..
  • कृषि, पशु पालन, वाणिज्य (Commerce), अर्थशस्त्र (Economics).. 
  • नितिमत्ता (Morals & Ethic), मानदंड માનદંડ (Norms), मूल्यों (Values)..
  • दर्शनशस्त्र, आस्तिक-वाद, नास्तिक-वाद..

आदि के सार तत्व का ‘इष्ट जीवन’ संदर्भित स्वीकार किया गया है । क्योंकि यह सारे ही आयाम परस्पर पूरक है, अन्योन्य आश्रित है, आपस में सहायक है, इतरेतर अविभाज्य है ।

यह सभी क्षेत्र एवं विषयों के यथायोग्य हेतुलक्षी उपयोग से ‘इष्ट जीवन यापन’ को संभव और साकार करने हेतु ‘इष्ट जीवन’ मंच पर उपलब्ध है : 

‘इष्ट जीवन’ धारा होलिस्टिक पैकेज (साकल्य सम्पुट)।

यह होलिस्टिक पैकेज ‘इष्ट जीवन’ धारा :

  • आध्यात्मिकता एवं व्यावहारिकता के परस्पर अविभाज्य दो पहलुओं से सुदृढ़ है।
  • योग, भक्ति, तंत्र की त्रिवेणी है।
  • विज्ञान का ज्ञान, अभियांत्रिकी का कौशल, कला-क्रीड़ा का सामंजस्य तथा अनुशासन की परिपक्वता इन चारों घटकों से संवर्धित है।

‘इष्ट जीवन’ रचने, विकसित करने, जीने हेतु इस होलिस्टिक पैकेज में सिद्धांत एवं अभ्यास का सुनियोजित, सुआयोजित, सुव्यवस्थित समन्वय सधा हुआ है। जिसके अंतर्गत विभिन्न आवश्यक सूत्र, निति, नियम, युक्ति, उपाय इत्यादि तथा उनके व्यवहार सुलभ यथोचित प्रयोग, विधि, पद्धति, क्रिया प्रक्रिया समाविष्ट है।

इस होलिस्टिक पैकेज में ‘इष्ट जीवन’ उत्क्रांति अनुलक्षी मार्गदर्शन और सहयोग की सेवाओं एवं तत संदर्भित उपयोगी साधन सामग्री आदि की आपूर्ति का आयोजन उपलब्ध कराया जाएगा ।

”इष्ट जीवन’ मंच’ पर इस होलिस्टिक पैकेज को उसके संभावित सहभागियों (Prospective Participants) के लाभार्थ एवं इसे व्यवहार सुलभ बनाने  हेतु प्रमुख तीन चरण है :

  1. स्पष्टीकरण से बोध 
  2. संस्कार से प्रशिक्षण 
  3. अभ्यास से व्यवहार

इन चरणों अनुसार हम ‘ ‘इष्ट जीवन’ ‘ धारा को अपना सकते हैं, आचरण में ला सकते हैं । तद् अनुसार ‘इष्ट जीवन’ पाने – जीने हेतु :

  1. पहले चरण में सहभागी को यहाँ प्रस्तुत संकल्पना और सिद्धांत को बराबर जानना, समझना और उस संबंधित बोध को यथार्थ रूप में ग्रहण करना होगा । 
  2. दूसरे चरण में सहभागी को इस मंच पर प्रयोज्य सूत्र और प्रयोग आदि के संस्कार और प्रशिक्षण की सुलभ  सुविधाओं का सुयोग्य उपभोग पाना होगा । 
  3. तीसरे चरण में सहभागी को इस मंच के माध्यम से जो बोध और प्रशिक्षण पाया होगा उसके नित्य नियमित अभ्यास से एवं व्यावहारिक उपयोग से ‘इष्ट जीवन’ की भव्यता को, धन्यता को, सार्थकता को उपलब्ध होना है  ।

प्रक्रिया क्या है?

‘इष्ट जीवन यापन’ के इच्छुक और कृतनिश्चयी ऐसे संभावित सहभागी यह होलिस्टिक पैकेज से लाभान्वित हो सके इसे अपना सके इस हेतु यहाँ प्रस्तुत है :

‘इष्ट जीवन धारा सूत्रपात प्रसंग’ (ISHT Lifestream Inception Event)

यह सूत्रपात प्रसंग अर्थात ‘इष्ट जीवन यापन’ का मंगलाचरण !  इस प्रसंग में :

  • योग-साधना, भक्ति-आराधना, तंत्र-प्रायोगिकता के प्रारंभिक अभ्यासक्रम का समावेश हुआ है । 
  • आयुर्वेद, वास्तु, ज्योतिष, कुल परंपरा वगैरह विषयों की यथोचित उपयोगिता अनुलक्षी मार्गदर्शन का निरूपण हुआ है । 
  • कर्म, ऋणानुबंध, भाग्य (Luck), भावितव्यता (Destiny), पाप और पुण्य आदि बाबत तटस्थ और निष्पक्ष रूप में निवेदित हुई है ।  
  • आहार, निद्रा, शौच, व्यायाम, श्वसन, ऊर्जान्वीकरण, धारणा और वाणी इत्यादि जीवन के आधारस्तंभ ऐसे अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दों को समाविष्ट किया गया है ।

💠  यह एक दिवसीय प्रसंग होगा, जो सवेरे से उस दिन की देर शाम तक चलेगा ।

💠   इस प्रसंग में हिंगलिश (हिंglish) या ગુજલીશ (ગુજlish) भाषा  का उपयोग किया जाएगा !!!

💠   इस प्रसंग के दौरान सहभागिओं हेतु तीन वक्त के खान-पान की सुविधा रखी जाएगी ।

सविनय सूचित किया जाता है कि :

‘इष्ट जीवन’ धारा सूत्रपात प्रसंग में सहभागी होकर आप मंच को सहकार का जो यह सुअवसर प्रदान कर रहे हैं, ईस लिए मंच अत्र धन्यता अनुभव कर रहा है !

इस सूत्रपात प्रसंग निमित्त कार्य करते समय सौभाग्यशाली मंच-सदस्य वास्तव में तो:

  • ‘उपलब्धि का प्रसार’ इस प्रकृति सहज कर्तव्य का पालन ही कर रहे हैं ।  
  • उन सब के प्रति जिनकी वजह से आज यह किया जा सका है; माता – पिता, गुरुजन – संतजन, उपदेशक – उपकारक, मार्गदर्शक – नायक, संगी – साथी, सहकर्मी – सहायक, ज्ञात-अज्ञात समर्थक एवं हितैषी ऐसे सभी के प्रति कृतज्ञता का अनुभव करते हैं।  
  • सांप्रत समाज के प्रति सेवा सहयोग के दायित्व पालन का संतोष पा रहे हैं । 
  • इष्ट से अनुगृहीत हो रहे हैं ।

और इस लिए ही इस ‘इष्ट जीवन’ धारा सूत्रपात प्रसंग में भाग लेने वाले सहभागियों को इस हेतु कोई आर्थिक मूल्य चुकाना नहीं है !

संभावित सहभागी (Prospective Participants )

कोई भी शारीरिक-मानसिक रूप से आत्मनिर्भर वयस्क; स्वयं के, प्रियजनों के, समाज, राष्ट्र तथा विश्व सकल के ‘इष्ट  जीवन’ को संभव या साकार करने ”इष्ट जीवन’ धारा सूत्रपात प्रसंग’ में भाग ले सकते हैं । ‘इष्ट जीवन’ धारा सूत्रपात प्रसंग में भाग लेने वाले सहभागियों को इस हेतु कोई आर्थिक मूल्य चुकाना रहता नहीं !

अधिक जानकारी पाने हेतु : I’m Interested Form में आपका नामांकन आमंत्रित है, सो कृपया स्वीकार कीजिए 🙏  ⤵️

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